
नर्मदापुरम। सोलह दिवसीय श्राद्ध पक्ष में तर्पण का समापन अमावस्या के दिन हुआ। पूर्णिमा से लेकर पितृमोक्ष अमावस्या तक सोलह दिन पितृ तर्पण किए जाते हैं। मां नर्मदा नदी के विभिन्न घाटों पर आज रविवार को पितृ मोक्ष अमावस्या पर पितरों को विदा किया गया। लाखो श्रद्धालुओ ने नर्मदा नदी में डुबकी लगाई। पूर्णिमा से लेकर अमावस्या तक नर्मदा तट के सेठानी घाट, मंगलवारा घाट और विवेकानंद घाट सहित अन्य घाटों पर प्रतिदिन ब्राह्मणों द्वारा पितरों का जल तर्पण मंत्रोचार के साथ कराया गया, जहां लोगो ने अपने पितृ सहित अज्ञात लोगों का भी तर्पण किया । हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार 16 दिन पितरों लिए तय किए गए हैं। पितृपक्ष के इन दिनों में किए गए दान पुण्य और तर्पण से पूर्वजों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है और पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। वही पितृ मोक्ष अमावस्या पर तर्पण करने वालों को कई गुना फल मिलता है।
नर्मदा नदी में किया लाखो लोगो ने स्नान
अमावस्या की तिथि पर नर्मदा नदी के सेठानी घाट, विवेकानंद घाट, मंगलवारा सहित अन्य घाटों पर दूर दूर से आए लाखो श्रद्धालुओ ने स्नान कर घाटों पर पूजन अर्चन और दान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
प्रशासन ने संभाली व्यवस्था
अमावस्या के दिन नर्मदा नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालु गहरे पानी में ना जाए जिसके लिए प्रशासन ने घाटों पर पुलिस, होमगार्ड, एस डी आर ई एफ के जवान तैनात किए। वही यातायात व्यवस्था सुचारू संचालन के लिए भी घाटों के मुख्य द्वार पर भी यातायात पुलिस के सिपाही भी तैनात किए गए। जिनके द्वारा वाहनों को व्यवस्थित पार्किंग करवाए गए ताकि यातायात प्रभावित न हो।
विवेकानंद घाट पर आयोजित पितृ तर्पण के बारे में पंडित कृष्ण कुमार मिश्रा जी ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक पितृ तर्पण का आयोजन किया गया। आज अमावस्या की तिथि पर पितृ तर्पण का समापन किया गया है । तर्पण करने से पितृ की आत्मा को शांति मिलती है। पितृ मोक्ष अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने, तर्पण करने और दान दक्षिणा करने से पुण्य लाभ मिलता है।

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